Tuesday, October 24, 2017

Durga chalisa in hindi lyrics दुर्गा चालीसा

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maa durga
Durga Chalisa is one of the most Popular daily worship hymns in Hinduism A devotee should chant Durga Chalisa in morning or in evening to please Devi. Especially in Navratri Puja, this Chalisa Paatha gives peace of mind, fills your mind with positive energy and protection from bad events in life.

Shree Durga Chalisa in Hindi text-


नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्बे दुःख हरनी।।१।।
निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूँ लोक फैली उजियारी।।२।।

शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला।।३।।
रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे।।४।।

तुम संसार शक्ति लै कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना।।५।।
अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला।।६।।

प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिवशंकर प्यारी।।७।।
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें।।८।।

रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि-मुनिन उबारा।।९।।
धरा रूप नरसिंह को अम्बा। प्रगट भईं फाड़कर खम्बा।।१०।।

रक्षा कर प्रह्लाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो।।११।।
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं।।१२।।

क्षीरसिन्धु में करत विलासा। दयासिन्धु दीजै मन आसा।।१३।।
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी।।१४।।

मातंगी अरु धूमावति माता। भुवनेश्वरी बगला सुख दाता।।१५।।
श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी।।१६।।

केहरि वाहन सोह भवानी। लांगुर वीर चलत अगवानी।।१७।।
कर में खप्पर-खड्ग विराजै। जाको देख काल डर भाजे।।१८।।

सोहै अस्त्र और त्रिशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला।।१९।।
नगर कोटि में तुम्हीं विराजत। तिहुंलोक में डंका बाजत।।२०।।

शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे। रक्तबीज शंखन संहारे।।२१।।
महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघ भार मही अकुलानी।।२२।।

रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित तुम तिहि संहारा।।२३।।
परी भीर सन्तन पर जब-जब। भई सहाय मातु तुम तब तब।।२४।।

अमरपुरी अरु बासव लोका। तब महिमा सब रहें अशोका।।२५।।
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी। तुम्हें सदा पूजें नर-नारी ।।२६।।

प्रेम भक्ति से जो यश गावै। दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें ।।२७।।
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई। जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई ।।२८।।

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी। योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी।।२९।।
शंकर आचारज तप कीनो। काम अरु क्रोध जीति सब लीनो ।।३०।।

निशिदिन ध्यान धरो शंकर को। काहु काल नहिं सुमिरो तुमको।।३१।।
शक्ति रूप को मरम न पायो। शक्ति गई तब मन पछितायो ।।३२।।

शरणागत हुई कीर्ति बखानी। जय जय जय जगदम्ब भवानी।।३३।।
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा। दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा।।३४।।

मोको मातु कष्ट अति घेरो। तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो।।३५।।
आशा तृष्णा निपट सतावे। रिपु मूरख मोहि अति डर पावे।।३६।।

शत्रु नाश कीजै महारानी। सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी।।३७।।
करो कृपा हे मातु दयाला। ऋद्धि-सिद्धि दे करहु निहाला।।३८।।

जब लगि जियउं दया फल पाऊं। तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं।।३९।।
दुर्गा चालीसा जो नित गावै। सब सुख भोग परमपद पावै।।४०।।

देवीदास शरण निज जानी । करहु कृपा जगदम्ब भवानी।।४१।।
-श्रीदुर्गार्पणमस्तु-

More: Durga Saptashati All Stotras
Arti- Ambe tu hai Jagdambe Kali

Shree Durga Chalisa in english text-

Om
Namo Namo durge sukh karni, Namo namo ambe dukh harni.
Nirankar hai jyoti tumhari, tihu lok phailee ujiyaari.

Shashi lalaat mukh mahavishaala, netra laal bhrikuti Vikrala
Roop maatu ko adhik suhaave, daras karat jan ati sukh paave.

Tum Sansar shakti lai keenha, paalan hetu anya dhan deena.
Annpurna hui jagpala, tum hi aadi sundari baala.

Pralaykaal sab naashan hari, tum gauri shiv shankar pyari.
shiv yogi tumhre gun gaave, bramha vishnu tumhenit dhyaavein

rup saraswati ka tum dhara, de subudhi rishi munin ubara.
dhara rup narshingh ko amba, prakat bhayi maa phor ke khambha.

raksha kar prahlad bachayo, hiranyach ko swrag pathayo.
lakshmi roop dharo jag mahi, shree narayan ang samahi.

cheer sindhu me karat vilasa,daya sindhu deeje man asha.
hinglaaj me tumhi bhavani, mahima amit na jae bakhani.

matangi dhoomavati mata, bhuvneswari bagla sukh data.
shee bhairav tara jag tarini, chinn bhal bhav dukh nivarani

kehari vahan soh bhavani, langur veer chalat agvani.
kar me khappar khadag viaje jako dekh kaal dar bhage.

sohe astra or trishula, jate uthat satru hiy shula.
nagar kot me tumhi virajat, tihun lok me danka bajat.

sumbh nisumbh daanav tum maare, raktbeej sankhan sanghare.
mahisasur nrip ati abhimani jehi aghvaar mahi akulaani.

roop karal kaal ko dhaara, sen sahit utm tehi sanhara.
pari bheer santan pe jab jab, bhayi sahaye matu tum tab tab.

amarpuri aru basabloka, tab mahima sab rahe asoka.
jwala me hai jyoti tumhari, tumhe sada puje nar nari.

prem bhakti se jo gun gave, dukh daridra nikat nahi aavein.
dhyaanvein tumhe jo nar man laayi, janm maran te so chut jayi.

jogi sur muni kahat pukari, yog na hoye bin shakti tumhari.
shankar acharaj tap keenho, kaam or krodh jet sab leeno.

nishdin dhyaan dharo shankar ko, kahu kaal nhi sumro tumko.
shakti rup ko maram na payo shakti gayi tab man pachtayo.

sharnagat hui eeti bakhani, jai jai jai jagdamb bhavani.
bhai prassan aadi jagdamba, dayi shakti nahi keen bilamba.

moko matu kast ati ghero, tum bin kon hare dukh mero
asha trashna nipat satave, ripu murakh mohi ati dar paave.

shatru naash keeje maharani sumro ikchit tumhe bhavani.
karahun kripa he maat dayala, ridhi sidhi de karat nihaala

jab lagi jiyun dayafal paun, tumhro yash me sada sunau.
durga chalisa jo nit gaave, sab sukh bhog param pad paave

Devidaas Sharan Nij Jaani, Karahu kripa Jagdamb Bhavaani.

More: Arti, Jai Ambe Gauri

Benefits of Durga Chalisa- 

This Patha is done to get grace of Goddess shakti. Above verses 30-34 describe that Adi Shankara worshiped Shiva so he won over Lust and Anger. But he did not worship Goddess Shakti, so he lost power. When he worshiped Shakti, Devi Durga pleased on him and gave power to him (line 34).

The one who worships Devi with this divine mantra, he certainly gets prosperity and protection from evil powers in this world.

Beside reading this mantra, Durga Saptashati Patha is also recommended in Navaratri to worship Bhagawati Durga with full devotion.

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Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi-

दोहा
श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि,
बराणु रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार,
बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार।।

चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर,
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥

राम दूत अतुलित बल धामा,
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥२॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी,
कुमति निवार सुमति के संगी॥३॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा,
कानन कुंडल कुँचित केसा॥४॥

हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे,
काँधे मूँज जनेऊ साजे॥५॥

शंकर सुवन केसरी नंदन,
तेज प्रताप महा जगवंदन॥६॥

विद्यावान गुनी अति चातुर,
राम काज करिबे को आतुर॥७॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया,
राम लखन सीता मनबसिया॥८॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा,
विकट रूप धरि लंक जरावा॥९॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे,
रामचंद्र के काज सवाँरे॥१०॥

लाय सजीवन लखन जियाए,
श्री रघुबीर हरषि उर लाए॥११॥

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई,
तुम मम प्रिय भरत-हि सम भाई॥१२॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावै,
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥१३॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा,
नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते,
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥१५॥

तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा,
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥१६॥

तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना,
लंकेश्वर भये सब जग जाना॥१७॥

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू,
लिल्यो ताहि मधुर फ़ल जानू॥१८॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही,
जलधि लाँघि गए अचरज नाही॥१९॥

दुर्गम काज जगत के जेते,
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥२०॥

राम दुआरे तुम रखवारे,
होत ना आज्ञा बिनु पैसारे॥२१॥

सब सुख लहैं तुम्हारी सरना,
तुम रक्षक काहु को डरना॥२२॥

आपन तेज सम्हारो आपै,
तीनों लोक हाँक तै कापै॥२३॥

भूत पिशाच निकट नहि आवै,
महावीर जब नाम सुनावै॥२४॥

नासै रोग हरे सब पीरा,
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥

संकट तै हनुमान छुडावै,
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥२६॥

सब पर राम तपस्वी राजा,
तिनके काज सकल तुम साजा॥२७॥

और मनोरथ जो कोई लावै,
सोई अमित जीवन फल पावै॥२८॥

चारों जुग परताप तुम्हारा,
है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९॥

साधु संत के तुम रखवारे,
असुर निकंदन राम दुलारे॥३०॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता,
अस बर दीन जानकी माता॥३१॥

राम रसायन तुम्हरे पासा,
सदा रहो रघुपति के दासा॥३२॥

तुम्हरे भजन राम को पावै,
जनम जनम के दुख बिसरावै॥३३॥

अंतकाल रघुवरपुर जाई,
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥३४॥

और देवता चित्त ना धरई,
हनुमत सेई सर्व सुख करई॥३५॥

संकट कटै मिटै सब पीरा,
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥३६॥

जै जै जै हनुमान गुसाईँ,
कृपा करहु गुरु देव की नाई॥३७॥

जो सत बार पाठ कर कोई,
छूटहि बंदि महा सुख होई॥३८॥

जो यह पढ़े हनुमान चालीसा,
होय सिद्ध साखी गौरीसा॥३९॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा,
कीजै नाथ हृदय मह डेरा॥४०॥

दोहा
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

Hanuman Chalisa lyrics in English -

 DOHA-


Shiv Chalisa Lyrics in Hindi शिव चालीसा लिरिक्स

Shiv Chalisa image

Shiv Chalisa in Hindi

।दोहा।
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान ।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ॥

।चौपाई।
जय गिरिजापति दीन दयाला । सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके । कानन कुण्डल नागफनी के॥

अंग गौर शिर गंग बहाये । मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे । छवि को देखि नाग मन मोहे ॥

मैना मातु की हवे दुलारी । बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी । करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे । सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ । या छवि को कहि जात न काऊ ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा । तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥
किया उपद्रव तारक भारी । देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

तुरत षडानन आप पठायउ । लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई । सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥
किया तपहिं भागीरथ भारी । पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं । सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥
वेद नाम महिमा तव गाई । अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला । जरत सुरासुर भए विहाला ॥
कीन्ही दया तहं करी सहाई । नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा । जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥
सहस कमल में हो रहे धारी । कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई । कमल नयन पूजन चहं सोई ॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर । भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी । करत कृपा सब के घटवासी ॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो । येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो । संकट ते मोहि आन उबारो ॥

मात-पिता भ्राता सब होई । संकट में पूछत नहिं कोई ॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी । आय हरहु मम संकट भारी ॥

धन निर्धन को देत सदा हीं । जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी । क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥

शंकर हो संकट के नाशन । मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं । शारद नारद शीश नवावैं ॥

नमो नमो जय नमः शिवाय । सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥
जो यह पाठ करे मन लाई । ता पर होत है शम्भु सहाई ॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी । पाठ करे सो पावन हारी ॥
पुत्र होन कर इच्छा जोई । निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई

पण्डित त्रयोदशी को लावे । ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा । ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे । शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥
जन्म जन्म के पाप नसावे । अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी । जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

।दोहा।
नित्त नेम उठि प्रातः ही, पाठ करो चालीसा ।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश ॥

मगसिर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान ।
स्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥  
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Shiva Chalisa in English-

Doha-
Jai ganesh Girija Suvan, Mangal Mool Sujaan.
Kahat Ayodhyadaas tum, Dehu Abhay Vardaan.

Chopaai-
Jai Girija Pati Deeen dayalaa, Sada Karat santan Pratipala.
Bhaal chandrama sohat neeke, kaanan kundal naagphani ke.

Ang aur sir gang bahaaye, Mundmaal tan chhaar lagaaye.
Vastr khaal baaghambar sohe, chhavi ko dekh naag man mohe.

Maina maatu ki have dulaari, baam ang sohat chhavi nyaari.
kar trishul sohat chhavi bhaari, karat sada shatrun chhaykaari.

Nandi ganesh Sohai tahn Kaise, Sagar Madhya Kamal hai Jaise.
Kartik shyaam aur Ganraahu, Ya chhavi ko kahi jaat na kaahu.

Devan Jabaheen Jaay pukara, Tab hi dukh prabhu aap nivara.
Kiya upadrav taarak bhaari, Devan Sab mili tumahin juhaari.

Turat Shadaanan aap pathhayahu, Lavnimesh mahn maari Girayahu.
Aap Jalandhar asur Sanhaara, Suyash tumhaar vidit Sansaara.

Tripuraasur san Yuddh machaai, sabahin kripa kari leen bachaai.
Kiya Tapahin Bhaagirath bhaari, purab pratigya taasu puraari.

Daanin mein tum sahu kou naahin, Savak stuti karat Sadaaheen.
Ved naam mahima tav gaai, Akath Anaadibhed nahin paai.

Pragati udadh manthan mein jwala, Jarat surasur bhaye vihala.
Keenheen dayaa tahn kari sahaai, neelkanth tab naam kahaai.

Pujan ramchandra jab keenha, Jeet ke lank vibheeshan deenha.
Sahas kamal me ho rahe dhaari, keenh pariksha tabanhi puraari.

Ek kamal prabhu raakheu joi, kamal nayan pujan chahn soi.
Kathin bhakti dekhi prabhu shankar, bhaye prasann diye ichchhit var.

Jay jay jay anant avinaashi, karat kripa sab ke ghatvaasi.
Dusht Sakal nit mohi sataave, bhramat rahaun mohi chain na aave.

traahi traahi main naath pukaaraun, yehi avsar mohi aan ubaaro.
Lai trishul shatrun ko maaro, sankat te mohi aan ubaaro.

maat-pita bhraataa sab hoi, sankat me puchat nahin koi.

Swami ek hai aas tumhaari, aay harahu mam sankat bhaari.

Dhan Nirdhan ko det sadaahin, jo koi jaanche so phal paahin.
Astuti kehi vidhi karain tumhari, chamahu naath ab chook hamari.

Shankar ho sankat ke naashan, Mangal kaaran vighn vinashan.
Yogi yati muni dhyaan lagaaven, shaarad naarad shish navaaven.

namo namo jay namah shivaay, sur brahmaadik paar na paaye.
jo yah paath kare manlaayi, ta par hot hai shambhu sahaai.

riniyaan jo koi ho adhikaari, paath kare so paavan haari.
putr hon kar ichchha joi, nishchay shiv prasaad tehi hoi.

pandit trayodashi ko laave, dhyaan purvak hom karaave.
trayodashi vrat karai hamesha, taake tan nahin rahai kalesha.

dhup deep naivedya chadaave, shankar sammukh paath sunaave.
janm janm ke paap nasaave, ant dhaam shivpur me paave.

kahain ayodhya aas tumhaari, jaani sakal dukh harahu hamari.

Doha-
Nitt nem uthi praatahi, paath karo chaalees.
tum meri manokaamna purn karo jagdeesh.

Magsir chathhi hemant ritu, sanvat chausath jaan,
stuti chaalisa shivahi, purn keen kalyaan.

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Tags: Shiv Chalisa In hindi text, Shri Shiv chalisa, in english

Thursday, October 19, 2017

9 Facts about hinduism you probably don't know

Hindu
Hindu facts
Let's start-

1. Hinduism is world's oldest religion with it's roots going back to 10000 BC and hindu literature dating back to 7000 BC.

hinduism facts


2. Hinduism is the only religion which have God in form of women or Goddess.

hinduism facts

3. Budhhism and Jainism have its roots from Hindu dharma.

4. Former USA president Barrack Obama always carries the statue of Hanuman with him.
   barrack obama with hanuman statue

5. There are 1,08,000 recognized temples in India.
hindu old temple


6. Hinduism is not real word for religion, the real name for hinduism is Sanatan Dharma. This means 'eternal dharma' or 'eternal truth.'
man in divinity of sanatan dharma


7. Yoga, Panayama, Vastu, Palmistry, Astrology, Numerology which are popular in west, are all part of Hindu Dharma.
budhha doing yoga hinduism


8. World's tallest statue of Subramanyam Swami is in Malaysia.
subramanyam swami statue malaysia


9. Bodhidharman, A price from pallava dynasty, gave 'Martial Arts' to China.
bodhidharman at shaolin temple



5 Thoughts from Gita that will fire you

Geeta Things
Geeta facts
1. "The Power of God is always with you; through the activities of mind, sense, breathing and emotions; and is constantly doing all the work as you as a mere instrument."

2. "I am the aim of life, the lord and the inner witness, the abode of all. I am the only refuge, the one true friend; I am the beginning, the staying, and the end of creation. I am immortality and I am death; I am what is and what is not."

3. "Death is as sure for that which is born, as birth is for that which is dead. Therefore grieve not for what is inevitable."

4. "On this path effort never goes to waste, and thee is no failure, even a little effort towards spiritual awareness will protect you from the greatest fear."

5. "What the outstanding person does, others will try do same. The standards such people create, will be follwed by whole world." 

                                                     ~~Shree Krishna.
adr

Tuesday, October 17, 2017

Shiv Rudrashtakam lyrics in Hindi with meaning अर्थ सहित

Shiva Rudrashtakam lyrics with meaning
 रुद्राष्टक गोस्वामी तुलसीदास के द्वारा लिखा गया आठ श्लोकों का स्तोत्र है जो रामचितमानस के उत्तरकाण्ड के दोहा 108 के पहले दिया गया है। यह स्तोत्र भगवन शिव को समर्पित है। यहाँ रुद्राष्टक हिंदी और english में दिया गया है।
Read Here in - English

Shri Shiva Rudrashtakam Lyrics in hindi- 

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं 
विभुं व्यापकं ब्रम्ह्वेदस्वरूपम् ।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
 चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ।।



हे मोक्ष स्वरुप, विभु, व्यापक, ब्रह्म और वेद स्वरुप, ईशान दिशा के ईश्वर तथा सब के स्वामी श्री शिव जी, मैं  आपको नमस्कार करता हूँ। निजस्वरूप में स्थित (अर्थात माया आदि से रहित ), गुणों से रहित, भेदरहित, इच्छारहित, चेतन आकाश एवं आकाश को ही वस्त्र के रूप में धारण करने वाले दिगंबर [ अथवा आकाश को भी आच्छादित करने वाले ] आपको मैं भजता हूँ ।।

निराकारमोंकारमूलं तुरीयं 
गिराघ्यानगोतीतमीशं गिरीशं गिरीशम् ।
करालं महाकाल कालं कृपालं
गुणागार संसारपारं नतोऽहम् ।।

निराकार, ओंकार के मूल, तुरीय (तीनो गुणों से अतीत ), वाणी, ज्ञान और इन्द्रियों से परे, कैलाशपति, विकराल, महाकाल के भी काल, कृपालु, गुणों के धाम, संसार से परे आप परमेश्वर को मैं नमस्कार करते हूँ ।

तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं 
मनोभूत कोटिप्रभा श्री शरीरम् ।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गा 
लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ।।

जो हिमाचल के समान गौरवर्ण तथा गंभीर हैं, जिनके शरीर में करोड़ों कामदेवों की ज्योति एवं शोभा है, जिनके सिरपर सुन्दर गंगा नदी विराजमान हैं, जिनके ललाट पर द्वितीय का चन्द्रमा और गले में सर्प  सुशोभित है ।।

चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं 
प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं 
प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि ।।

जिनके कानों में कुण्डल हिल रहे हैं, सुन्दर भ्रुकुटी और विशाल नेत्र हैं; जो प्रसन्नमुख, नीलकंठ, और दयालु हैं; सिंहचर्म का वस्त्र धारण किये और मुण्ड माला पहने हुए हैं; उन, सबके प्यारे और सबके नाथ [ कल्याण करने वाले ] श्री शंकर जी को मैं भजता हूँ ।।

प्रचण्डं प्रकृष्टम प्रगल्भं परेशं 
अखण्डं अजं  भानुकोटिप्रकाशम् ।
त्रयःशूल निर्मूलनं शूलपाणिं 
भजेऽहम भवानीपतिं भावगम्यम् ।।

प्रचंड (रुद्ररूप), श्रेष्ठ, तेजस्वी, परमेश्वर, अखंड, अजन्मा, करोड़ों सूर्यों के सामान प्रकाश वाल, तीनों प्रकार के शूलों ( दुःखों ) का निर्मूलन ( निवारण ) करने वाले, हाथ में त्रिशूल धारण किये, भाव ( प्रेम ) के द्वारा प्राप्त होने वाले भवानी (माँ पार्वती ) के पति श्री शंकर जी को मैं भजता हूँ ।।

कालातीत कल्याण कल्पान्तकारी
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ।
चिदानन्द सन्दोह मोहापहारी 
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ।।

कलाओं से परे, कल्याणस्वरूप, कल्प का अंत ( प्रलय ) करने वाल, सज्जनों को सदा आनंद देने वाले, त्रिपुर के सच्चिदानन्दघन, मोह को हरने वाले, मन को मथने वाले कामदेव के शत्रु हे प्रभो, प्रसन्न होईये, प्रसन्न होईये।।

न यावद् उमानाथ पादारविन्दम 
भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।
न तावद् सुखं शान्तिसन्तापनाशं 
प्रसीद प्रभो सर्व भूतादिवासम् ।।

जब तक पार्वती  के पति आपके चरण कमलों को मनुष्य नहीं भजते, तब तक उन्हें न तो इस लोक और न ही परलोक में सुख-शान्ति मिलती है और न ही उनके तापों का नाश होता है। अतः हे समस्त जीवों के अंदर ( ह्रदय में ) निवास करने वाले प्रभो ! प्रसन्न होइए।।

न जानामि योगं जपं नैव पूजां 
नतोऽहम सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम् ।
जराजन्म दुःखौघ तातप्यमानं 
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो।।

मैं  न तो योग जानता हूँ, न ही जप और न पूजा ही। हे शम्भो मैं तो सदा सर्वदा आपको ही नमस्कार करता हूँ। हे प्रभो ! बुढ़ापा और जन्म ( मृत्यु ) के दुःख समूहों से जलते हुए मुझ दुखी की दुखों से रक्षा कीजिये। हे ईश्वर ! हे शम्भो ! मैं आपको नमस्कार करता हूँ।।

[ श्लोक ]  ।। रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये,
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति ।।


भगवान रूद्र की स्तुति का यह अष्टक उन शंकर जी की तुष्टि ( प्रसन्नता ) के लिए ब्राह्मण द्वारा कहा गया। जो मनुष्य इसे भक्ति पूर्वक पढ़ते है, उन पर भगवान् शम्भू प्रसन्न होते हैं।।

।। इति श्री गोस्वामी तुलसीदासकृतं रुद्राष्टकम सम्पूर्णम् ।।
 [ इस प्रकार गोस्वामी तुलसीदास के द्वारा रचित यह रुद्राष्टक पूरा हुआ ]


Shiva Rudrashtakam lyrics in english-

Namami- shamishan nirvan rupam,
Vibhum vyapakam brahmvedaswarupam,
Nijam nirgunam nirvikalpam nireeham,
Chidaakaash maakaashvaasam bhajeaham. 1.

Nirakar monkaar mulam tureeyam,
Giragyan gotitmeesham girisham,
Karalam Mahakal kaalam kripalam,
Gunagaar sansaar paaram natoaham. 2.

tusharadri sankaash gouram gambhiram,
manobhut kotiprabha shri shariram,
sphuranmouli kallolini chaaru ganga,
lasadbhaal baalendu kanthe bhujanga. 3.

chalatkundalam bhru sunetram vishaalam,
psannananam neelkantham dayaalam,
mrigadheesh charmambaram mundmaalam,
priyam shankar sarvnaatham bhajaami. 4.

prachandam prakrishtam pragalbham paresham,
akshndam ajam bhaanukoti prakasham,
trayah shul nirmulanam shulipaanim,
bhajeaham bhavaanipatim bhaavgamyam. 5.

kalaateet kalyan kalpaantkaari,
sada sajjananand data purari,
chidanand sandoh mohapahari,
prasid prasid prabho manmathaari. 6.

na yaavad umanaath padarvindam,
bhajam teeh loke pare va naraanaam,
na taavad sukham shaanti santaapnaasham,
prasid prabho sarv bhutadivaasam. 7.

na jaanaami yogam japam naiv pujaam,
natoaham sada sarvada shambhu tubhyam,
jarajanm duhkhough taatapymaanam,
prabho paahi aapannamamish shamobho. 8.

[ shlok ] rudrashtak midam proktam vipren hartoshaye,
ye pathanti nara bhaktya teshaam shambhu prasidati ||

[ iti shri shiva rudrashtakam sampurnam]

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Friday, August 11, 2017

Mahishasura Mardini stotram lyrics in Hindi with Meaning

Mahishasura Mardini devi

Mahishasur Mardini Stotram lyrics in hindi- (Click here for English lyrics)

Mahishasura Mardini stotram (also known as ayi giri nandini stotra) was originally written by Guru Adi Shankaracharya. (some sources say that it was first orated by Lord Vishnu at the time Devi Durga killed the demon Mahishasura).  

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 Here, this stotra is given with hindi meaning. Hindi Translation  is done with the help of a website greenmesg.org and English lyrics are also given below. Here goes Mahishasura Mardini Stotram meaning in hindi-

।। अथ श्री महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम ।।

अयि गिरि नन्दिनी नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते।
गिरिवर विन्ध्यशिरोधिनिवासिनी विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ।
भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।।१।।


Meaning- हे हिमालायराज की कन्या, विश्व को आनंद देने वाली, नंदी गणों के द्वारा नमस्कृत, गिरिवर विन्ध्याचल के शिरो (शिखर) पर निवास करने वाली, भगवान् विष्णु को प्रसन्न करने वाली, इन्द्रदेव के द्वारा नमस्कृत, भगवान् नीलकंठ की पत्नी, विश्व में विशाल कुटुंब वाली और विश्व को संपन्नता देने वाली हे महिषासुर का मर्दन करने वाली भगवती! अपने बालों की लता से आकर्षित करने वाली पर्वत की पुत्री तुम्हारी जय हो, जय हो, जय हो।

सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते ।
त्रिभुवनपोषिणि शंकरतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते ।।
दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणी सिन्धुसुते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।।२।।


अर्थ- देवों को वरदान देने वाली, दुर्धर और दुर्मुख असुरों को मारने वाली और स्वयं में ही हर्षित (प्रसन्न) रहने वाली, तीनों लोकों का पोषण करने वाली, शंकर को संतुष्ट करने वाली, पापों को हरने वाली और घोर गर्जना करने वाली, दानवों पर क्रोध करने वाली, अहंकारियों के घमंड को सुखा देने वाली, समुद्र की पुत्री हे महिषासुर का मर्दन करने वाली, अपने बालों की लता से आकर्षित करने वाली पर्वत की पुत्री तुम्हारी जय हो, जय हो, जय हो।

अयि जगदम्बमदम्बकदम्ब वनप्रियवासिनि हासरते ।
शिखरिशिरोमणि तुङ्गहिमालय शृंगनिजालय मध्यगते ।।
मधुमधुरे मधुकैटभगन्जिनि कैटभभंजिनि रासरते ।
 जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।।३।।


अर्थ- हे जगतमाता, मेरी माँ, प्रेम से कदम्ब के वन में वास करने वाली, हास्य भाव में रहने वाली, हिमालय के शिखर पर स्थित अपने भवन में विराजित, मधु (शहद) की तरह मधुर, मधु-कैटभ का मद नष्ट करने वाली, महिष को विदीर्ण करने वाली,सदा युद्ध में लिप्त रहने वाली हे महिषासुर का मर्दन करने वाली अपने बालों की लता से आकर्षित करने वाली पर्वत की पुत्री तुम्हारी जय हो, जय हो, जय हो।

अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्ड गजाधिपते ।
रिपु गजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रम शुण्ड मृगाधिपते ।।
निजभुज दण्ड निपतित खण्ड विपातित मुंड भटाधिपते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।।४।।


अर्थ- शत्रुओं के हाथियों की सूंड काटने वाली और उनके सौ टुकड़े करने वाली, जिनका सिंह शत्रुओं के हाथियों के सर अलग अलग टुकड़े कर देता है, अपनी भुजाओं के अस्त्रों से चण्ड और मुंड के शीश काटने वाली हे महिषासुर का मर्दन करने वाली अपने बालों की लता से आकर्षित करने वाली पर्वत की पुत्री तुम्हारी जय हो, जय हो, जय हो।

अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभृते ।
चतुरविचारधुरीणमहाशिव दूतकृत प्रथमाधिपते ।।
दुरितदुरीह दुराशयदुर्मति दानवदूत कृतान्तमते ।
 जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।।५।।


अर्थ- रण में मदोंमत शत्रुओं का वध करने वाली, अजर अविनाशी शक्तियां धारण करने वाली, प्रमथनाथ (शिव) की चतुराई जानकार उन्हें अपना दूत बनाने वाली, दुर्मति और बुरे विचार वाले दानव के दूत के प्रस्ताव का अंत करने वाली, हे महिषासुर का मर्दन करने वाली अपने बालों की लता से आकर्षित करने वाली पर्वत की पुत्री तुम्हारी जय हो, जय हो, जय हो।

अयि शरणागत वैरिवधूवर वीरवराभय दायकरे ।
त्रिभुवनमस्तक शुलविरोधि शिरोऽधिकृतामल शूलकरे ।।
दुमिदुमितामर धुन्दुभिनादमहोमुखरीकृत दिङ्मकरे ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।।६।।


अर्थ- शरणागत शत्रुओं की पत्नियों के आग्रह पर उन्हें अभयदान देने वाली, तीनों लोकों को पीड़ित करने वाले दैत्यों पर प्रहार करने योग्य त्रिशूल धारण करने वाली, देवताओं की दुन्दुभी से 'दुमि दुमि' की ध्वनि को सभी दिशाओं में व्याप्त करने वाली हे महिषासुर का मर्दन करने वाली अपने बालों की लता से आकर्षित करने वाली पर्वत की पुत्री तुम्हारी जय हो, जय हो, जय हो।

अयि निजहुङ्कृति मात्रनिराकृत धूम्रविलोचन धूम्रशते।
समरविशोषित शोणितबीज समुद्भवशोणित बीजलते।।
शिवशिवशुम्भ निशुम्भमहाहव तर्पितभूत पिशाचरते।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।।७।।


अर्थ- मात्र अपनी हुंकार से धूम्रलोचन राक्षस को धूम्र (धुएं) के सामान भस्म करने वाली, युद्ध में कुपित रक्तबीज के रक्त से उत्पन्न अन्य रक्तबीजों का रक्त पीने वाली, शुम्भ और निशुम्भ दैत्यों की बली से शिव और भूत-प्रेतों को तृप्त करने वाली हे महिषासुर का मर्दन करने वाली अपने बालों की लता से आकर्षित करने वाली पर्वत की पुत्री तुम्हारी जय हो, जय हो, जय हो।

धनुरनुषङ्ग रणक्षणसङ्ग परिस्फुरदङ्ग नटत्कटके ।
कनकपिशङ्ग पृषत्कनिषङ्ग रसद्भटशृङ्ग हताबटुके ।।
कृतचतुरङ्ग बलक्षितिरङ्ग घटद्बहुरङ्ग रटद्बटुके ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।।८।।


अर्थ- युद्ध भूमि में जिनके हाथों के कंगन धनुष के साथ चमकते हैं, जिनके सोने के तीर शत्रुओं को विदीर्ण करके लाल हो जाते हैं और उनकी चीख निकालते हैं, चारों प्रकार की सेनाओं [हाथी, घोडा, पैदल, रथ] का संहार करने वाली अनेक प्रकार की ध्वनि करने वाले बटुकों को उत्पन्न करने वाली हे महिषासुर का मर्दन करने वाली अपने बालों की लता से आकर्षित करने वाली पर्वत की पुत्री तुम्हारी जय हो, जय हो, जय हो।

सुरललना ततथेयि तथेयि कृताभिनयोदर नृत्यरते ।
कृत कुकुथः कुकुथो गडदादिकताल कुतूहल गानरते ।।
धुधुकुट धुक्कुट धिंधिमित ध्वनि धीर मृदंग निनादरते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।।९।।


अर्थ- देवांगनाओं के तत-था थेयि-थेयि आदि शब्दों से युक्त भावमय नृत्य में मग्न रहने वाली, कु-कुथ अड्डी विभिन्न प्रकार की मात्राओं वाले ताल वाले स्वर्गीय गीतों को सुनने में लीन, मृदंग की धू-धुकुट, धिमि-धिमि आदि गंभीर ध्वनि सुनने में लिप्त रहने वाली हे महिषासुर का मर्दन करने वाली अपने बालों की लता से आकर्षित करने वाली पर्वत की पुत्री तुम्हारी जय हो, जय हो, जय हो।

जय जय जप्य जयेजयशब्द परस्तुति तत्परविश्वनुते ।
झणझणझिञ्झिमि झिङ्कृत नूपुरशिञ्जितमोहित भूतपते ।।
नटित नटार्ध नटी नट नायक नाटितनाट्य सुगानरते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।।१०।।


अर्थ- जय जयकार करने और स्तुति करने वाले समस्त विश्व के द्वारा नमस्कृत, अपने नूपुर के झण-झण और झिम्झिम शब्दों से भूतपति महादेव को मोहित करने वाली, नटी-नटों के नायक अर्धनारीश्वर के नृत्य से सुशोभित नाट्य में तल्लीन रहने वाली हे महिषासुर का मर्दन करने वाली अपने बालों की लता से आकर्षित करने वाली पर्वत की पुत्री तुम्हारी जय हो, जय हो, जय हो।

अयि सुमनःसुमनःसुमनः सुमनःसुमनोहरकान्तियुते ।
श्रितरजनी रजनीरजनी रजनीरजनी करवक्त्रवृते ।।
सुनयनविभ्रमर भ्रमरभ्रमर भ्रमरभ्रमराधिपते।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।।११।।


अर्थ- आकर्षक कान्ति के साथ अति सुन्दर मन से युक्त और रात्रि के आश्रय अर्थात चंद्र देव की आभा को अपने चेहरे की सुन्दरता से फीका करने वाली, काले भंवरों के सामान सुन्दर नेत्रों वाली हे महिषासुर का मर्दन करने वाली अपने बालों की लता से आकर्षित करने वाली पर्वत की पुत्री तुम्हारी जय हो, जय हो, जय हो।

सहितमहाहव मल्लमतल्लिक मल्लितरल्लक मल्लरते ।
विरचितवल्लिक पल्लिकमल्लिक झिल्लिकभिल्लिक वर्गवृते ।।
शितकृतफुल्ल समुल्लसितारुण तल्लजपल्लव सल्ललिते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।।१२।।


अर्थ- महायोद्धाओं से युद्ध में चमेली के पुष्पों की भाँति कोमल स्त्रियों के साथ रहने वाली तथा चमेली की लताओं की भाँति कोमल भील स्त्रियों से जो झींगुरों के झुण्ड की भाँती घिरी हुई हैं, चेहरे पर उल्लास (ख़ुशी) से उत्पन्न, उषाकाल के सूर्य और खिले हए लाल फूल के समान मुस्कान वाली, हे महिषासुर का मर्दन करने वाली, अपने बालों की लता से आकर्षित करने वाली पर्वत की पुत्री तुम्हारी जय हो, जय हो, जय हो।

अविरलगण्ड गलन्मदमेदुर मत्तमतङ्गजराजपते ।
त्रिभुवनभूषण भूतकलानिधि रूपपयोनिधि राजसुते ।।
अयि सुदतीजन लालसमानस मोहन मन्मथराजसुते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।।१३।।


अर्थ- जिसके कानों से अविरल (लगातार) मद बहता रहता है उस हाथी के समान उत्तेजित हे गजेश्वरी, तीनों लोकों के आभूषण रूप-सौंदर्य, शक्ति और कलाओं से सुशोभित हे राजपुत्री, सुंदर मुस्कान वाली स्त्रियों को पाने के लिए मन में मोह उत्पन्न करने वाली मन्मथ (कामदेव) की पुत्री के समान, हे महिषासुर का मर्दन करने वाली अपने बालों की लता से आकर्षित करने वाली पर्वत की पुत्री तुम्हारी जय हो, जय हो, जय हो।

कमलदलामल कोमलकान्ति कलाकलितामल भाललते ।
सकलविलास कलानिलयक्रम केलिचलत्कल हंसकुले ।।
अलिकुलसङ्कुल कुवलयमण्डल मौलिमिलद्बकुलालिकुले ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।।१४।।


अर्थ- जिनका कमल दल (पंखुड़ी) के समान कोमल, स्वच्छ और कांति (चमक) से युक्त मस्तक है, हंसों के समान जिनकी चाल है, जिनसे सभी कलाओं का उद्भव हुआ है, जिनके बालों में भंवरों से घिरे कुमुदनी के फूल और बकुल पुष्प सुशोभित हैं उन महिषासुर का मर्दन करने वाली अपने बालों की लता से आकर्षित करने वाली पर्वत की पुत्री की जय हो, जय हो, जय हो।

करमुरलीरव वीजितकूजित लज्जितकोकिल मञ्जुमते।
मिलितपुलिन्द मनोहरगुञ्जित रञ्जितशैल निकुञ्जगते।।
निजगणभूत महाशबरीगण सद्गुणसम्भृत केलितले।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।।१५।।

अर्थ- जिनके हाथों की मुरली से बहने वाली ध्वनि से कोयल की आवाज भी लज्जित हो जाती है, जो [खिले हुए फूलों से] रंगीन पर्वतों से विचरती हुयी, पुलिंद जनजाति की स्त्रियों के साथ मनोहर गीत जाती हैं, जो सद्गुणों से सम्पान शबरी जाति की स्त्रियों के साथ खेलती हैं उन महिषासुर का मर्दन करने वाली अपने बालों की लता से आकर्षित करने वाली पर्वत की पुत्री की जय हो, जय हो, जय हो।

कटितटपीत दुकूलविचित्र मयुखतिरस्कृत चन्द्ररुचे।
प्रणतसुरासुर मौलिमणिस्फुर दंशुलसन्नख चन्द्ररुचे।।
जितकनकाचल मौलिमदोर्जित निर्भरकुञ्जर कुम्भकुचे।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।।१६।।

अर्थ- जिनकी चमक से चन्द्रमा की रौशनी फीकी पड़ जाए ऐसे सुन्दर रेशम के वस्त्रों से जिनकी कमर सुशोभित है, देवताओं और असुरों के सर झुकने पर उनके मुकुट की मणियों से जिनके पैरों के नाखून चंद्रमा की भांति दमकते हैं और जैसे सोने के पर्वतों पर विजय पाकर कोई हाथी मदोन्मत होता है वैसे ही देवी के उरोज (वक्ष स्थल) कलश की भाँति प्रतीत होते हैं ऐसी हे महिषासुर का मर्दन करने वाली अपने बालों की लता से आकर्षित करने वाली पर्वत की पुत्री तुम्हारी जय हो, जय हो, जय हो।

विजितसहस्रकरैक सहस्रकरैक सहस्रकरैकनुते।
कृतसुरतारक सङ्गरतारक सङ्गरतारक सूनुसुते।।
सुरथसमाधि समानसमाधि समाधिसमाधि सुजातरते।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।।१७।।

अर्थ- सहस्रों (हजारों) दैत्यों के सहस्रों हाथों से सहस्रों युद्ध जीतने वाली और सहस्रों हाथों से पूजित, सुरतारक (देवताओं को बचाने वाला) उत्पन्न करने वाली, उसका तारकासुर के साथ युद्ध कराने वाली, राजा सुरथ और समाधि नामक वैश्य की भक्ति से सामान रूप से संतुष्ट होने वाली हे महिषासुर का मर्दन करने वाली बालों की लता से आकर्षित करने वाली पर्वत की पुत्री तुम्हारी जय हो, जय हो, जय हो।

पदकमलं करुणानिलये वरिवस्यति योऽनुदिनं सुशिवे।
अयि कमले कमलानिलये कमलानिलयः स कथं न भवेत् ।।
तव पदमेव परम्पदमित्यनुशीलयतो मम किं न शिवे।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।।१८।।

अर्थ- जो भी तुम्हारे दयामय पद कमलों की सेवा करता है, हे कमला! (लक्ष्मी) वह व्यक्ति कमलानिवास (धनी) कैसे न बने? हे शिवे! तुम्हारे पदकमल ही परमपद हैं उनका ध्यान करने पर भी परम पद कैसे नहीं पाऊंगा? हे महिषासुर का मर्दन करने वाली बालों की लता से आकर्षित करने वाली पर्वत की पुत्री तुम्हारी जय हो, जय हो, जय हो।

कनकलसत्कलसिन्धुजलैरनुषिञ्चति तेगुणरङ्गभुवम् ।
भजति स किं न शचीकुचकुम्भतटीपरिरम्भसुखानुभवम् ।
तव चरणं शरणं करवाणि नतामरवाणि निवासि शिवम् ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।।१९।।


अर्थ- सोने के समान चमकते हुए नदी के जल से जो तुम्हे रंग भवन में छिड़काव करेगा वो शची (इंद्राणी) के वक्ष से आलिंगित होने वाले इंद्र के समान सुखानुभूति क्यों न पायेगा? हे वाणी! (महासरस्वती) तुममे मांगल्य का निवास है, मैं तुम्हारे चरण में शरण लेता हूँ, हे महिषासुर का मर्दन करने वाली बालों की लता से आकर्षित करने वाली पर्वत की पुत्री तुम्हारी जय हो, जय हो, जय हो।

तव विमलेन्दुकुलं वदनेन्दुमलं सकलं ननुकूलयते।
किमु पुरुहूतपुरीन्दु मुखीसु मुखीभिरसौ विमुखीक्रियते।
ममतु मतं शिवनामधने भवती कृपया किमुतक्रियते।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ।।२०।।

अर्थ- तुम्हारा निर्मल चन्द्र समान मुख चन्द्रमा का निवास है जो सभी अशुद्धियों को दूर कर देता है, नहीं तो क्यों मेरा मन इंद्रपूरी की सुन्दर स्त्रियों से विमुख हो गया है? मेरे मत के अनुसार तुम्हारी कृपा के बिना शिव नाम के धन की प्राप्ति कैसे संभव हो सकती है? हे महिषासुर का मर्दन करने वाली बालों की लता से आकर्षित करने वाली पर्वत की पुत्री तुम्हारी जय हो, जय हो, जय हो।

अयि मयि दीन दयालु-तया कृपयैव त्वया भवितव्यमुमे।
अयि जगतो जननी कृपयासि यथासि तथानुमितासिरते।।
यदुचितमत्र भवत्युररीकुरुतादुरुतापमपाकुरुते।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते।।२१।।

अर्थ- हे दीनों पर दया करने वाली उमा! मुझ पर भी दया कर ही दो, हे जगत जननी! जैसे तुम दया की वर्ष करती हो वैसे ही तीरों की वर्ष भी करती हो, इसलिए इस समय जैसा तुम्हें उचित लगे वैसा करो मेरे पाप और ताप दूर करो, हे महिषासुर का मर्दन करने वाली बालों की लता से आकर्षित करने वाली पर्वत की पुत्री तुम्हारी जय हो, जय हो, जय  हो।

।। इति श्री महिषासुरमर्दिनी स्तोत्रम सम्पूर्णम् ।।

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Mahishasura Mardini Stotram lyrics in English

Ayigiri Nandini Nandita Medini Vishwa Vinodini Nandinute.
Giriwara- vindhya shirodhi nivaasini vishnu vilasini Jishnunute.
Bhagwati he shitikantha kutumbini bhoorikutumbini burikrite.
Jay jay he mahishasura mardini ramyakapardini shailasute. 1.

Surwar varshini durdhara dharshini durmukh marshini harsharate.
tribhuvana poshini shankaratoshini kilvishamoshini ghosharate.
danuj niroshini ditisutaroshini durmada shoshini sindhu sute.
jaya jaya he Mahishasura mardini ramyakapardini shelsute. 2.

ayi jagadamb- madamb- kadamb vanapriya vasini haasarate.
Shikhari shiromani tung himalaya shringa- nijalaya madhyagate.
madhumadhure madhu kaitabhaganjini kaitabh bhanjini raasarate.
Jay jay he mahishasura mardini ramyakapardini shailasute. 3.

Ayi shatakhand vikhanditarund vitundita shund gajaadhipate.
ripugajagand vidaaranachand parakram shund mrigaadhipate.
nijabhujadand nipaatita khand vipaatita mund bhataadhipate.
Jay jay he mahishasura mardini ramyakapardini shailasute. 4.

ayi rana durmada shatru vadhodita durdhar nirjara shakti bhrite.
chatura- vichaaradhurina mahaashiva duta krita prathamaadhipate.
durita dureeh durashaya durmati daanav duta kritaantmate.
Jay jay he mahishasura mardini ramyakapardini shailasute. 5.

ayi sharanagta vairivadhoovar veervarabhaya daay kare.
tribhuvana mastaka shula virodhi shirodhikritamal shulakare.
dumidumitaamar dundubhinaad mahomukhari krit dingmakare.
Jay jay he mahishasura mardini ramyakapardini shailasute. 6.

ayinija hunkrati maatraniraakrita dhoomravilochan dhumrashate.
samaravishoshit shonita- beeja- samudbhav- shonita beejalate.
shivashivashumbh nishumbh mahahav tarpitbhut pishaacharate.
Jay jay he mahishasura mardini ramyakapardini shailasute. 7.

dhanuranushang ranakshanasang parisphuradang natatkatake.
kanakapishang prishatkanishang rasad- bhatshring hatabatuke.
kritachaturang balakshitirang ghatadbahurang ratad-batuke.
Jay jay he mahishasura mardini ramyakapardini shailasute. 8.

suralalanaa tatatheti tatheyi kritabhinayodara nrityarate.
krit kukuthah kukutho gadadaadi kataal kutoohal gaanrate.
dhudhukut dukkuta dhindhimi tadhwani dheer mridang ninaadarate.
Jay jay he mahishasura mardini ramyakapardini shailasute. 9.

jay jay japya jaye jaya shabda parastuti tatpara vishvanute.
jhana-jhana jhimjhimi jhimkritanupura sinchitamohita butapate.
natita nataardh nati nat naayaka naatita naatya sugaanarate.
Jay jay he mahishasura mardini ramyakapardini shailasute. 10

ayi sumanah sumanah sumanah sumanohara kaantirate.
shritarajani rajani rajani rajani rajani karavaktravrite
sunayan vibhramara bhramara bhramara bhramara bhramaradhipate.
Jay jay he mahishasura mardini ramyakapardini shailasute. 11.

sahita mahahav mallamatallika mallitarallaka mallarate.
virachit vallika pallika mallika jhil-lika bhil-lika vargavrite.
shitakrita- fulla- samulla- sitaaruna tallaj pallava sallalite.
Jay jay he mahishasura mardini ramyakapardini shailasute. 12.

avirala ganda galanmada medura mattamatangaja raajapte.
tribhuvana bhushana bhutakala nidhi roop payonidhi raajasute.
ayi sudatijana laalasamaanas mohan manmatharaajasute.
Jay jay hey mahishasura mardini ramyakapardini shailasute. 13.

kamal dalaamal komal kaanti kalaa kalitamal bhaalalate.
sakal vilaasakala nilayakram kelichalatkal hamsakule.
alikula sankula kuvalaya mandala mauli miladvakulaalikule.
Jay jay hey mahishasura mardini ramyakapardini shailasute. 14.

karamuralirav veejita kujita lajjita kokila manjumate.
milita pulinda manohara gunjita ranjita shaila nikunjagate.
nijaganabhuta mahaashabari gana sadgun sambhrita kelitale.
Jay jay he mahishasura mardini ramyakapardini shailasute. 15.

katitatapeeta dukoola vichitra mayokhati raskrita chandraruche.
pranatasurasura maulimanisphur danshula sannakha chandraruche.
jitakanakaachala mauli madorjita nirbhar kunjara kumbhakuche.
Jay jay hey mahishasura mardini ramyakapardini shailasute. 16.

Vijita sahasra karaika sahasra karaik sahasra kareikanute.
kritasura taaraka sangara taarak sangara taaraka soonusute.
suratha samaadhi samaan samaadhi samaan samadhi sujaatarate.
Jay jay he mahishasura mardini ramyakapardini shailasute. 17.

padakamalam karuna nilaye varivasya tiyonudinam sushive.
ayi kamale kamalanilaye kamalaanilayah sa katham na bhavet.
tava padamev parampada mityanu shreelayato mama kim na shive.
Jay jay he mahishasura mardini ramyakapardini shailasute. 18.

kanakala satkala sindhujalai ranu shinchinute guna rangabhuvam.
bhajati sa kim na shachikuch kumbh tatiparirambha sukhaanubhavam.
tav charanam sharanam karavani natamarvaani nivaasi shivam.
Jay jay he mahishasura mardini ramyakapardini shailasute. 19.

tava vimalendu kulam vadanendu malam sakalam nanukoolayate.
kimu puruhoot purindu mukheesumukhee bhirasau vimukhikriyate.
mamatu matam shiva naam dhane bhavati kripaya kimutakriyate.
Jay jay he mahishasura mardini ramyakapardini shailasute. 20.

ayi mayi deendayalu taya kripayeiva tvaya bhavi tavya mume.
ayi jagato janani kripayasi yathaasi tathaa numitaasirate.
yaduchita matra bhavatyurari kurutaa durutaa pamapaakurute.
Jay jay he mahishasura mardini ramyakapardini shailasute. 21.

| iti shri mahishasura mardini stotram sampurnam |

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