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Friday, July 19, 2019

Ardhanareeswara Stotram (अर्धनारीश्वर स्तोत्र) in Sanskrit Hindi

Ardhanari Nateshwara Stotram in Hindi-

।अथ अर्धनारीश्वर स्तोत्रम्।

चाम्पेयगौरार्धशरीरकायै कर्पूरगौरार्धशरीरकाय।
धम्मिल्लकायै च जटाधराय नमः शिवयै च नमः शिवाय।।1।।

जिनका आधा शरीर चम्पा के फूलों जैसा है और शेष आधा शरीर कर्पूर के जैसे गोरे शंकर जी का है. जो [आधे शारीर पर] जटा धारण किये हुए हैं और जिनके [आधे शरीर पर] सुन्दर केशपाश सुशोभित हो रहे हैं, ऐसे पार्वती और भगवान शंकर को प्रनाम है.

कस्तूरिकाकुङ्कुमचर्चितायै चितारजःपुञ्जविचर्चिताय।
कॄतस्मरायै विकॄतस्मराय नमः शिवायै च नमः शिवाय ।।2।।

जिन पार्वती के शरीर पर कस्तूरी और कुमकुम का लेप लगा हुआ है और भगवान शंकर के शरीर पर चिता की भस्म लगी हुई है. पार्वती कामदेव को जिलाने वाली है और महादेव उसे नष्ट करने वाले हैं. ऐसे पार्वती और शंकर भगवान को मेरा नमस्कार है.

चलत्क्वणत्कङ्कणनूपुरायै पादाब्जराजत्फणिनूपुराय।
हेमाङ्गदायै भुजगाङ्गादाय नमः शिवायै च नमः शिवाय ।।3।।

जो [पार्वती] पैरों में चमकती हुई पायल को धारण किये हुए है, जो [भगवान् शिव] पैरों में सर्पराज की पायल पहने हैं, जो [पार्वती] सोने के बाजूबंद पहने हुए हैं और जो [शिव] भुजा में सर्प धारण किये हैं उन शिव को नमस्कार है और शिवा (शिवा अर्थात पार्वती) को नमस्कार है.

विशालनीलोत्पललोचनायै विकासिपङ्केरुहलोचनाय।
समेक्षणायै विषमेक्षणाय नमः शिवायै च नमः शिवाय ।।4।।

जिन [पार्वती] के बड़े नेत्र खिले हुए नीले कमल के समान हैं, जिन [शिव] के नेत्र खिले हुए कमल के समान बड़े हैं, जिन [पार्वती] के दो (सम या Even) नेत्र हैं और जिनके तीन (विषम या Odd) नेत्र हैं, उन शिवा को नमस्कार है और उन शिव को नमस्कार है.

मन्दारमालाकलितालकायै कपालमालाङ्कितकन्धराय।
दिव्यांबरायै च दिगंबराय नमः शिवायै च नमः शिवाय ।।5।।

जिन [पार्वती] के केश (बाल) मन्दार के फूलों से सुसज्जित हैं, जो [शिव] मुंडों की माला पहने हुए हैं, जिन [पार्वती] वस्त्र दिव्य हैं और जो [शिव] दिगंबर [आकाश को वस्त्र के रूप में धारण करने वाले अर्थात निर्वस्त्र] हैं उन शिवा और शिव को नमस्कार है.

अंभोधरश्यामळकुन्तळायै तडित्प्रभाताम्रजटाधराय ।
निरीश्वरायै निखिलेश्वराय नमः शिवायै च नमः शिवाय ।।6।।

जिन [पार्वती] के केश जल से भरे हुए काले बादलों के समान हैं, जिन [शिव] की जटा में बिजली की चमक जैसी लालिमा है, जिन [पार्वती] का कोई ईश्वर नहीं है (निरीश्वर अर्थात परम स्वतंत्र) और जो [शिव] समस्त संसार के ईश्वर हैं उन शिवा को नमस्कार है और उन शिव को नमस्कार है.

प्रपञ्चसृष्ट्युन्मुखलास्यकायै समस्तसंहारकताण्डवाय ।
जगज्जनन्यै जगदेकपित्रे नमः शिवायै च नमः शिवाय ।।7।।

जिन [पार्वती] का नृत्य सृष्टि का निर्माण करता है, जिन [शिव] का नृत्य सृष्टि-प्रपंच के संहार का प्रतीक है, जिन [पार्वती] जो [पार्वती] संसार की माता हैं और जो संसार के एकमेव (एकमात्र) पिता हैं उन शिवा को नमस्कार है और उन शिव को नमस्कार है.

प्रदीप्तरत्नोज्ज्वलकुण्डलायै स्फुरन्महापन्नगभूषणाय ।
शिवान्वितायै च शिवान्विताय नमः शिवायै च नमः शिवाय ।।8।।

जो [पार्वती] चमकते हुए रत्न जड़ित कुंडल पहने हैं, जो फुफकार करते हुए नाग को आभूषण के रूप में धारण किये हैं, जो [पार्वती] शिव से समन्वित हैं और जो [शिव] शिवा से समन्वित हैं उन शिवा और शिव को नमस्कार हैं.

फलश्रुति:
एतत्पठेदष्टकमिष्टदं यो भक्त्या स मान्यो भुवि दीर्घजीवी।
प्राप्नोति सौभाग्यमनन्तकालं भूयात्सदा तस्य समस्तसिद्धिः।।

यह आठ श्लोकों का अष्टक (स्तोत्र) अभीष्ट फल की प्राप्ति कराने वाला है. जो भी इसका भक्तिपूर्वक पाठ करता है वह संसार में सम्मानित होता है और लम्बी आयु तक जीता है. वह अनंत काल तक सौभाग्य और समस्त सिद्धियों को प्राप्त करता है.

।इति श्री अर्धनारीश्वर स्तोत्रम् संपूर्णम् ।

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Shiv Panchakshara Stotram Lyrics शिव पंचाक्षर स्तोत्र



 Mantra: Shiv Panchakshari Stotra (Hindi)

शिव पंचाक्षर स्तोत्र की रचना आदि शंकराचार्य ने की थी. भगवान शिव के पंचाक्षरी (पांच अक्षर वाले) मन्त्र "ॐ नमः शिवाय" मन्त्र पर आधारित इस स्तोत्र से शंकराचार्य भगवान् की स्तुति करते हैं और इस मन्त्र के महत्त्व को बताते हैं. इस स्तोत्र के मन्त्र हिंदी अर्थ सहित यहाँ दिए गए हैं--

।अथ शिव पंचाक्षर स्तोत्रम।
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम: शिवाय।।१।।

जो नागेंद्र ( नागराज ) को हार स्वरुप धारण  करते हैं, जो त्रिलोचन ( तीन नेत्रों वाले ) हैं, जो भस्म से अलंकृत हैं, उन महेश्वर, नित्य, शुद्ध, दिगंबर ( जिसका अम्बर दिशाओं के सिवा कुछ न हो ), 'न' अक्षर के द्वारा विदित स्वरुप को नमस्कार है।

मन्दाकिनी सलिल चन्दनचर्चिताय, नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय।
मन्दार पुष्पबहुपुष्प सुपूजिताय, तस्मै मकाराय नम: शिवाय।।२।।

मन्दाकिनी ( गंगाजल ) और चन्दन से जिनकी अर्चना होती है, मंदार और अन्यान्य पुष्पों से जिनकी सुन्दर पूजा हुई है, उन नंदी के अधिपति और प्रमथगणों के स्वामी महेश्वर 'म' कार स्वरुप भगवान शिव को नमस्कार है।

शिवाय गौरी वदनाब्जवृन्द सूर्याय दक्षाध्वर नाशकाय।
श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय, तस्मै शिकाराय नम: शिवाय।।३।।

जो कल्याण स्वरुप हैं, जो पार्वती जी के मुख कमल को प्रसन्न करने के लिए जो सूर्य देव के सामान हैं , जो राजा दक्ष के यज्ञ का नाश करने वाले हैं, जो वृषध्वज हैं ( जिनकी ध्वजा पर बैल का चिन्ह है ) उन शोभावान श्री नीलकंठ 'शि' कार स्वरुप शिव को नमस्कार है।

वसिष्ठकुम्भोद्भव गौतमार्य मुनीन्द्रदेवार्चित शेखराय।
चन्द्रार्कवैश्वानर लोचनाय, तस्मै वकाराय नम: शिवाय।।४।।

वसिष्ठ, कुम्भोद्भव ( घड़े से उत्पन्न होने वाले अगस्त्य मुनि ), गौतम आदि मुनियों और इन्द्रादि देवताओं के द्वारा अर्चित ( पूजित ), चन्द्रमा, सूर्य, अग्नि जिनके तीन नेत्र हैं, उन 'व' कार स्वरुप शिव को नमस्कार है।

यक्षस्वरूपाय जटाधराय, पिनाकहस्ताय सनातनाय।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय, तस्मै यकाराय नम: शिवाय।।५।।

जिन्होंने यक्ष रूप धारण किया है, जो जटाधारी हैं, जो हाथ में पिनाक ( धनुष ) धारण किये हैं, उन दिव्य देव, दिगंबर 'य' कार स्वरुप शिव को नमस्कार है।

पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं य: पठेच्छिव सन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते।।

जो कोई शिव के इस पंचाक्षर मन्त्र का नित्य पाठ करता है, वह शिवलोक को प्राप्त कर शिव जी के साथ आनंदित होता है।

।इति श्री शिव पंचाक्षर स्तोत्रम सम्पूर्णम।

Shiv Panchakshar stotram English Lyrics-

Naagendra Haray Trilochanaay,
Bhasmang Ragay Maheshwaray,
Nityaay shudhhay digambaraay,
Tasmai na karay namah Shivaay.1.

Mandakini Salila chandan Charchitaay,
Nandishwar Pramathnath maheshwaraay,
Mandaar pushpa bahupushpa supujitaay,
Tasmai ma kaaray namah Shivaay.2.

Shivaay gouri vadanabj vrind,
Suryaay dakshadhwar naashkaay,
shri nilkanthaay vrishdwajaay,
Tasmai shi karay namah Shivaay.3.

Vashishth Kumbhodbhav goutamaary,
Munindra Devarchita shekharaay,
Chnadrark Vaishwa Naralochanaay,
Tasmai va karay Namah Shivaay.4.

Yaksha swarupaay Jatadharaay,
Pinaak hastaay Sanatanaay,
Divyaay Devaay digambaraay,
Tasmai ya karay namah Shivaay.5.

Panchaksharmidam punyam yah pathechhiv Sannidhhou,
Shivlokama vaapnoti Shiven Sah Modate.

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