Saturday, May 9, 2020

What has BJP done for Hindus Since 2014? Lets take a look...

Bhartiya Janata Party came into power in 2014 by criticizing then UPA government on corruption agenda. Also, major reasons why BJP had won 73 seats out of 80 in Uttar Pradesh and got LokSabha Majority on its own were:
  •   Modi Wave
  • Ram Mandir case
  • Article 370/ 35A
  • Poor Economy
BJP has long been following the ideologies of Nationalism and Hinduism which helped the party perform extremely well in Hindu Majority Areas.

As we have seen through the year 2019, they have been doing great. Some of their works include scrapping Article 370/ 35A and bringing CAB (Citizenship Amendment Bill) into law. Also, Ram Mandir verdict is a milestone in Indian Judicial History.

But keep this aside, we need to look at what did Narendra do since 2014 which has changed the life of Hindus?

Narendra modi Hindus

1. The government that doesn’t only care for Minorities:

Once, ex-PM Manmohan Singh said, “Minorities have first right on country’s resources.” In India, equality was a myth because the government was giving benefits only to the minority.

Modi government introduced a new category of “Economically weaker section” and made it possible for poor general category people to get benefits of government’s facilities.

Narendra modi daring decisions

2. Modi dares to do challenging tasks:

When the Supreme court-ordered to stop Haj Subsidies and make Triple Talaq illegal, He stopped Haj subsidies equating Hindus and Muslims.

Although abolishing triple talaq was a big challenge for Modi, he did not hesitate to complete this challenging task.

Narendra modi

3. International recognition of Hindu Culture:

Since 2014, Narendra Modi made people respect Hindu Culture more in overseas. Everyone accepts that Yoga is a big gift from India to the world.

Also, temples are being made by Muslim countries like Saudi Arabia and Qatar, RSS is growing in the USA.
What are Future Plans?

In manifesto 2014 of BJP, it is stated that the party has many long term missions to complete. Also, the public is demanding some new policies to be introduced. Some of them are:
1. More campaigns like clean Ganga Mission to take clean rivers mission on the next level.
2. Uniform civil code, that means the same law irrespective of someone’s religion.
3. Population control law in order to keep religion demographics unchanged.
4. NRC, yes it is not cancelled and only postponed.

Conclusion:

Call them good or bad but everybody accepts that this man is taking daring steps toward united India. And the most important thing Modi has done for Hindus is that “He united us.”

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Friday, April 24, 2020

Kalabhairava Ashtakam Lyrics कालभैरव अष्टक

Kaalbhairav Ashatakam

Kalabhairav Ashtakam Lyrics in Hindi with Meaning- कालभैरव अष्टकं


कालभैरव अष्टक शिव जी के काल भैरव रूप को समर्पित है। आदि शंकराचार्य के द्वारा लिखा गया यह स्तोत्र भगवान कालभैरव के विकराल और भयंकर रूप की स्तुति करता है। भगवान् काल भैरव का रूप उग्र और प्रचंड है लेकिन वे बहुत ही भोले और सरल स्वभाव के हैं। वे अपने भक्तों से प्रेम करते हैं तथा अपने भक्तों की रक्षा के लिए वे सदैव तत्पर रहते हैं।

। अथ श्री कालभैरवाष्टकं ।
देवराजसेव्यमान-पावनांघ्रिपङ्कजम्।
व्याल-यज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम्।।
नारदादियोगि-वृन्दवन्दितम् दिगम्बरं।
काशिकापुराधिनाथ-कालभैरवं भजे।।1।।

अर्थ- जिनके पद कमलों (चरणों) की सेवा स्वयं देवराज इंद्र करते हैं, जो सर्प को पवित्र हार के रूप में धारण करते हैं और जो परम दयालु हैं।
नारद आदि योगी जिनकी वंदना करते हैं और जो दिगम्बर हैं उन काशी नगर के नाथ कालभैरव को [मैं] भजता हूँ।

भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परम्।
नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम्।।
कालकालमंबुजाक्षमक्ष-शूलमक्षरं ।
काशिकापुराधिनाथ-कालभैरवं भजे।।2।।

अर्थ- जो करोड़ों सूर्य के समान दीप्ति (प्रकाश) वाले हैं, जो परमेश्वर भवसागर से तारने वाले हैं, जिनका कंठ (गला) नीला है, जो सांसारिक समृद्धि प्रदान करते हैं और जिनके तीन नेत्र हैं
जो काल के भी काल हैं, जो कमल के समान नेत्र हैं, जिनका त्रिशूल तीनों लोकों को धारण करता है और जो अविनाशी हैं उन काशी नगर के नाथ [स्वामी] कालभैरव को [मैं] भजता हूँ।

शूलटङ्कपाश-दण्डपाणिमादिकरणम् ।
श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम् ।।
भीमविक्रमं प्रभुम् विचित्रताण्डवप्रियं ।
काशिकापुराधिनाथ-कालभैरवं भजे ।।3।।

अर्थ- जो अपने हाथों में त्रिशूल, कुल्हाड़ी, पाश (फन्दा) और दंड धारण करते हैं, जो सृष्टि के सृजन के कारण हैं, जो श्याम वर्ण के (सांवले रंग के) हैं, जो आदिदेव सांसारिक रोगों से परे हैं
जो अनंत भुजबल से सशक्त हैं, जिन्हें विचित्र तांडव नृत्य प्रिय है उन काशी नगर के नाथ कालभैरव को [मैं] भजता हूँ।

भक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं ।
भक्तवत्सलम्  स्थितम् समस्तलोकविग्रहं।।
विनिक्-वणन्मनोज्ञहेम-किङ्किणीलसत्कटिं ।
काशिकापुराधिनाथ-कालभैरवं भजे ।।4।।

अर्थ- जो भक्ति और मुक्ति प्रदान करते हैं, जो शुभऔर आनंददायक रूप धारणकरते हैं, जो भक्त वत्सल अर्थात भक्तों से प्रेम करते हैं और जो सभी लोकों में स्थित हैं
जो अपनी कमर पर विभिन्न प्रकार की आनंददायक ध्वनि उत्पन्न करने वाली सोने की घंटियाँ धारण करते हैं उन काशी नगर के नाथ कालभैरव को [मैं] भजता हूँ।

धर्मसेतुपालकम् त्वधर्ममार्गनाशकम् ।
कर्मपाशमोचकं सुशर्मदायकं विभुम् ।।
स्वर्णवर्णशेष-पाशशोभिताङ्ग्मण्डलम् ।
काशिकापुराधिनाथ-कालभैरवं भजे ।।5।।

अर्थ- जो धर्म की रक्षा करते हैं और अधर्म के मार्ग का नाश करते हैं, जो कर्मों के जाल से मुक्त करते हैं और आत्मा को सुखद आनंद देते हैं
जो अपने शरीर पर लिपटे स्वर्ण रंग के साँपों से सुशोभित हैं उन काशी नगर के नाथ कालभैरव को [मैं] भजता हूँ।

रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकम् ।
नित्यमद्-वितीयमिष्टदैवतं निरञ्जनम् ।।
मृत्युदर्पनाशनं करालदन्ष्ट्रमोक्षणम् ।
काशिकापुराधिनाथ-कालभैरवं भजे ।।6।।

अर्थ- जिनके पद्युग्म (दोनों पैर) रत्न जड़ित पादुकाओं से प्रकाशित हैं, जो अनंत, अद्वितीय और इष्ट देव (प्रधान देवता) और परम पवित्र हैं
जो अपने भयानक दांतों से मृत्यु के भय का नाश करते हैं और इस भय से मुक्ति प्रदान करते हैं उन काशी नगर के नाथ कालभैरव को [मैं] भजता हूँ।

अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोश-संततिं ।
दृष्टिपातनष्टपापजालमुग्रशासनम् ।।
अष्टसिद्धिदायकं कपालमालिकाधरं ।
काशिकापुराधिनाथ-कालभैरवं भजे ।।7।।

अर्थ- जिनके भयंकर अट्टहास (हंसी) की ध्वनि से कमल से उत्पन्न ब्रह्मा की सभी कृतियों की गति रुक जाती है,
जिनकी भयावह दृष्टि पड़ने पर पापों के शासन का जाल नष्ट हो जाता है
जो अष्ट सिद्धियाँ प्रदान करते हैं, और जो मुंडों की माला धारण करते हैं उन काशी नगर के नाथ कालभैरव को [मैं] भजता हूँ।

भूतसंघनायकं विशालकीर्तिदायकम् ।
काशिवासलोकपुण्यपापशोधकं विभुम्।।
नीतिमार्गकोविदम् पुरातनम् जगत्पतिम् ।
काशिकापुराधिनाथ-कालभैरवं भजे ।।8।।

अर्थ- जो भूतोंऔर प्रेतों के राजा हैं, जो विशाल कीर्ति प्रदान करते हैं, जो काशी में रहने वालों के पुण्यों और पाऊँ का शोधन करते हैं
जो सत्य और नीति का मार्ग दिखाते हैं, जो जगतपति और सर्वप्राचीन (आदिकाल से स्थित) हैं उन काशी नगर के नाथ कालभैरव को [मैं] भजता हूँ।

फलश्रुतिः
कालभैरवाष्टकं पठन्ति ये मनोहरम् ।
ज्ञानमुक्तिसाधनम् विचित्रपुण्यवर्धनम् ।।
शोकमोहदैन्यलोभकोप-तापनाशनम्  ।
प्रयान्ति कालभैरवान्घ्रिसन्निधिं नरा ध्रुवम्।।

अर्थ- जो इस मनोहारी काल भैरव अष्टक का पाठ करते हैं वे ज्ञान और मुक्ति के लक्ष्य को प्राप्त करते हैं और पुण्यों में वृद्धि करते हैं।
निश्चय ही वे नर मृत्यु के पश्चात शोक, मोह, दीनता, क्रोध और ताप का नाश करने वाले भगवान् काल भैरव के चरणों को प्राप्त करते हैं।

।इति श्री कालभैरवाष्टकं सम्पूर्णम।

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Kaalbhairava Ashtakam Benefits-
भगवान काल भैरव का अत्यंत भयावह स्वरुप भूत-प्रेतों को दूर रखता है। इस अष्टक का पाठ करने पर भगवान अपने भक्तों के दुःख दारिद्र और अहंकार को नष्ट कर देते हैं और सभी प्रकार के भय से मुक्त करते हैं।

इस अष्टक से भगवान कालभैरव की स्तुति करने पर क्रोध, शोक और सभी विघ्न-बाधाओं से मुक्ति मिलती है, इसमें संदेह नहीं है।

Thursday, April 23, 2020

What are Ashta Siddhi and Nav Nidhi of Hanuman


In Hanuman Chalisa you might have read the this line- "अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता" (Ashta Siddhi nav Nidhi ke Daata). You might have been thought about what is meaning of this line?

Ashta Siddhis (अष्ट सिद्धियाँ) means powers of 8 types. The word 'Siddhi' means 'the power which is obtained by establishing himself into perfect one or Atman (आत्मन)

Types and meaning of Eight Siddhis are given below-
  1. Anima (अणिमा)- The Siddhi or power of turning the body as small as the size of an Atom.
  2. Mahima (महिमा)- The power of expanding the body to an incrediblly big size.
  3. Garima (गरिमा)- The power of becoming infinitely heavy.
  4. Laghima (लघिमा)- The power of turning weight into negligible or almost weightless.
  5. Praapti (प्राप्ति)- The power of having access to any place in the world.
  6. Prakamya (प्राकम्या)- The power of knowing whatever one desires.
  7. Ishatva (ईशत्व)- The power of possessing total lordship (स्वामित्व या प्रभुत्व)
  8. Vastava (वस्तव)- The power to win from anyone or to subjugate anyone. (अजेय होना)
Nav Nidhi (नौ निधियां)- Nidhi means wealth or asset. Nav nidhis means the assets of 9 types. 9 Nidhis are as below-
  1. Mahapadma (महापद्म)- One Mahapdma = 100 Padma.
  2. Padma (पद्म)- 1 Padma = 100 Shankha.
  3. Shankha (शंख)- 1 shankha = 100 Makar.
  4. Makar (मकर)- 1 Makar = 100 Kachchapa.
  5. Kachhapa (कच्छप)- 1 Kachhapa = 100 Kumuda.
  6. Kumud (कुमुद)- 1 Kumuda = 100 Kunda.
  7. Kunda (कुंद)- 1 Kunda = 100 Neel.
  8. Neel (नील)- 1 Neel = 100 Kharva
  9. Kharva (खर्व या खरब)-  1 Kharava = 100 Araba (Araba =  Billion)
These Nidhis are owned by Lord Kuber (कुबेर) as he is Senapati (Warlord) of Lord Vishnu.

Siddhis can be obtained by Mantra Sadhana. There have been many persons who got Mantra Siddhi and Still they exist in Himalayas (if we listen to rumours).

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Wednesday, April 22, 2020

Sankat Mochan Hanuman Ashtak Lyrics in Hindi, English

Hanuman Ashtak

Hanuman Ashtak in Hindi (click here for English):

चौपाइयों का हिंदी अर्थ अष्टक के नीचे दिया गया है। इस अष्टक के बाद बजरंग बाण का पाठ करना अत्यंत  शुभ होता है। हनुमान अष्टक का पाठ संकट से रक्षा करने के लिए किया जाता है। गोस्वामी तुलसीदास के द्वारा लिखा गया यह अष्टक संकट से रक्षा करता है।  (शत्रु नाश के लिए बजरंग बाण का पाठ अति आवश्यक है. बजरंग बाण पढ़ने के लिए- यहाँ क्लिक करें )

चौपाई-
बाल समय रवि भक्षि लियो तब, तीनहुं लोक भयो अँधियारो ।
ताहि सोत्रास भयो जग को, यह संकट काहू सों जात न टारो ।।
देवन आनि करी विनती, तब छाड़ि दियो रवि कष्ट निवारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो ।।1।।

बालि की त्रासकपीस बसै गिर, जात महाप्रभु पंथ निहारो।
चौंकि महामुनि श्राप दियो तब चाहिए कौन विचार विचारो।।
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु सो तुम दास के शोक निवारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो।।2।।

अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो ।
जीवत न बचिहौ हम सोहि, बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो ।।
हेरि थकै तट सिंधु सबै तब, लाये सिया सुधि प्राण उबारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो ।।3।।

रावण त्रास दई सिय को, तब राक्षसि सो कहि शोक निवारो ।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु जाय महा रजनीचर मारो।।
चाहत सीय असोक सों आगिसू, दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो।।4।।

बाण लग्यो उर लछमन के तब, प्राण तजै सुत रावण मारो ।
लै गृह बैद सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सुबीर उपारो ।।
आनि संजीवन हाथ  दई , तब लछमन के तुम प्राण उबारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो ।।5।।

रावण युद्ध अजान कियो तब नाग की फाँस सबै सिर डारो ।
श्री रघुनाथ समेत सबै दल मोह भयो यह संकट भारो ।।
आनि खगेस तबै हनुमान जू, बंधन काटि सो त्रास निबारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो।।6।।

 बंधु समेत जबै अहिरावन लै रघुनाथ पताल सिधारो ।
देवहिं पूजि भली बिधि सों बलि, देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो।।
जाय सहाय भयो तबहिं, अहिरावन सैन्य समेत संहारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो।।7।।

काज किये बड़ देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि विचारो ।
कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसों नहिं जात है टारो ।।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु जो कछु संकट होय हमारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो।।8।।

दोहा-
लाल देह लाली लसे अरु धरि लाल लंगूर।
बज्र  देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर।।

।पवन सुत हनुमान की जय।

Sankat mochan Ashtak Meanign in Hindi (हिंदी अर्थ)-
1- हे महावीर हनुमान! आपने बाल्य अवस्था में सूर्य का भक्षण कर लिया था, तीनों लोकों में अंधकार फैल जाने पर जब देवताओं ने आकर आपसे प्रार्थना की तब आपने सूर्य को छोड़ दिया और सब को कष्ट से मुक्त किया।
संसार में ऐसा कौन है जो आपका संकटमोचन नाम नहीं जानता?

2- बाली के सताने पर सुग्रीव पहाड़ों में रहता था। जब सुग्रीव ने राम-लक्ष्मण को जाते देखा तो सुग्रीव को भय हुआ। हे हनुमान! तब आप ने ही ब्राह्मण वेश बनाकर प्रभु राम का भेद जान लिया और सुग्रीव का भय दूर किया। संसार में कौन है जो आपका संकटमोचन नाम नहीं जानता।

3- जब सुग्रीव ने अंगद आदि के साथ आपको सीता माता की खोज में भेजा यह कहकर भेजा कि जिसने सीता की खबर लाये बिना वापस यहाँ पग रखा तो उसे मैं जीवित नहीं छोडूंगा और जब सभी वानर खोज में थक कर समुद्र तट पर बैठ गए, तब आप ही सीता की खबर लेकर आये और सबके प्राणों की रक्षा की। संसार में कौन है जो आपके संकट मोचन नाम को नहीं जानता।

4 - जब रावण सीता माता को कष्ट देता था और सीता माता अपने प्राणों का अंत करना चाहती थीं। हे महाप्रभु! तब आपने ही जाकर अशोक वाटिका में राक्षसों का वध किया। आपने सीता माता को श्री राम की अंगूठी देकर उनका दुःख दूर किया। संसार में कौन है जो आपके संकटमोचन नाम को नहीं जानता।

5- जब रावण के पुत्र मेघनाद का बाण लगा, तब आप सुषेण वैद्य को उनके घर समेत उठाकर ले आये। सुषेण के कहने पर आप ही पूरा द्रोण पर्वत ही उठा लाये और संजीवनी बूटी देकर लक्ष्मण के प्राणो की रक्षा की। संसार में कौन है जो आपका संकटमोचन नाम नहीं जानता।

6- जब रावण ने मायावी युद्ध करके सभी को नागपाश में बाँध दिया और श्री राम सहित उनकी सेना भारी संकट में आ गयी।  तब आपने ही पक्षीराज गरुड़ को लाकर नागपाश के बंधन से सभी को मुक्त किया। हे महाकपि! कौन है जो आपके संकट मोचन नाम को नहीं जानता।

7- अहिरावण श्री राम और उनके भाई लक्ष्मण को लेकर पाताल में चल गया और राम-लक्ष्मण की बलि देना वाला था। तब आपने अहिरावण का उसकी सेना समेत वध करके श्री राम की सहायता की। हे प्रभु! संसार में कौन है जो आपका संकट मोचन नाम नहीं जानता।

8- हे हनुमान महाप्रभु! आपने देवों के बड़े-बड़े कार्यों को पूरा किया है।  अब ये भी विचार कीजिये कि मुझ गरीब का ऐसा कौन सा संकट है जिसे आप दूर नहीं कर सकते ? वेग पूर्वक मेरे संकटों को हर लीजिये। संसार में कौन है जो आपका संकट मोचन नाम नहीं जानता?

दोहा- हे लाल देह पर लाल सिन्दूर धारण करने वाले, बड़ी पूँछ धारण किये लंगूर रुपी, बज्र के सामान शरीर वाले और दानवों का नाश करने वाले वानरों के सूर्य तुम्हारी जय हो, जय हो, जय हो।

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Hanuman Ashtakam lyrics in English

Chaupaai-
Bal Samay Ravi Bhaksh liyo tab, teenahu lok bhayo Andhiyaaro.
Taahi So traas bhayo jag ko, yah sankat kaahu saun jaat na taaro.
Devan Aani kari vinati tab, chaadi diyo ravi kasht nivaaro.
Ko nahin Jaanat hai Jag mein kapi, Sankat mochan Naam Tihaaro.1

Baali ki traas Kapis basai giri jaat mahaprabhu pantha nihaaro.
Chaunki mahamuni sraap diyo tab chaahiye kaun vichaar vichaaro.
kaidvij roop livaay mahaaprabhu so tum daas ke shok nivaaro.
Ko nahin Jaanat hai Jag mein kapi, Sankat mochan Naam Tihaaro.2

Angad ke Sang lain Gaye Siy, Khoj Kapis Yah Bain uchaaro.
jeevat na bachihau ham sohi, Bina Sudhi laay yahan pagu dhaaro.
Heri Thake Tat Sindhu Sabai dal, laay Siya sudhi praan Ubaaro.
Ko nahin Jaanat hai Jag mein kapi, Sankat mochan Naam Tihaaro.3

Raavan traas dayi Siy ko, Tab Rakshasi so kahi Shok Nivaaro.
Taahi Samay hanuman mahaprabhu, Jaay maharajnichar Maaro.
Chaahat Seey Ashok Saun Aagi saun, Dai prabhu mudrika sok Nivaaro.
Ko nahin Jaanat hai Jag mein kapi, Sankat mochan Naam Tihaaro.4

Baan Lagyo Ur lakshman ko tab Praan taje sut raavan maaro.
le grah Vidya Sushen samet tabai giri drona Subeer Upaaro.
Aani Sanjivan Haath dayi tab lakshman ke tum praan ubaaro.
Ko nahin Jaanat hai Jag mein kapi, Sankat mochan Naam Tihaaro.5

Raavan yuddh Ajaan kiyo tab Naag ki phaans sabai sir daaro.
Shri raghunaath samet sabai Dal Moh bhayo yah sankat bhaaro.
Aani khages Tabai Hanuman ju Bandhan Kaati so traas nibaaro.
Ko nahin Jaanat hai Jag mein kapi, Sankat mochan Naam Tihaaro.6

Bandhu samet Jabai Ahiraavan lai Raghunath Pataal sidhaaro.
devahin pooji bhali bidhi son bali deu sabai mili mantra bichaaro.
Jaay Sahaay bhayo tabahin Ahiraavan Sainya Samet Sanhaaro.
Ko nahin Jaanat hai Jag mein kapi, Sankat mochan Naam Tihaaro.7

Kaaj kiye Bad Devan ke tum, Beer Mahaprabhu dekhi bichaaro.
Kaun so Sankat Mor Garib ko, Jo Tumson Nahi Jaat Hai taaro.
Begi Haro Hanuman Mahaprabhu Jo kachu Sankat Hoy Hamaro.
Ko nahin Jaanat hai Jag mein kapi, Sankat mochan Naam Tihaaro.8

Doha-
Laal Deh Laali Lasai, Aru Dhari Laal Langur.
Bajra deh Daanav Dalan, Jay Jay Jay Kapi Soor.

PAVAN SUT HANUMAN KI JAY

Tags: bal samay ravi bhaksh liyo lyrics, hanuman ashtak lyrics,

Friday, April 17, 2020

Bajrang Baan Lyrics in Hindi, Hanuman Baan


बजरंग बाण का अर्थ चौपाइयों के नीचे दिया गया है, साथ ही अंग्रेजी में लिरिक्स भी दी गयी है, गोस्वामी तुलसीदास के द्वारा रचित यह स्तुति हनुमान जी को समर्पित है. मंगलवार और शनिवार को इस बजरंग बाण का पाठ करने पर यह बड़ा ही उत्तम फल देता है. बजरंग बाण का पाठ करने से पहले हनुमान अष्टक का पाठ करना शुभ माना जाता है.

Hindi Lyrics- (click here for English)
दोहा ()-
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करे सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करै हनुमान।।

चौपाई-
जय हनुमंत संत हितकारी, सुनि लीजै प्रभु विनय हमारी।
जन के काज विलम्ब न कीजै, आतु दौर महासुख दीजै।।

जैसे कूदि सिन्धु के पारा, सुरसा बदन पैठि बिस्तारा।
आगे जाय लंकिनी रोका, मारेहु लात गयी सुर लोका।।

जाय विभीषन को सुख दीन्हा, सीता निरखि परम पद लीन्हा।
बाग़ उजारि सिन्धु मंह बोरा, अति आतुर जम कातर तोरा।।

अक्षय कुमार मारि संहारा, लूम लपेटि लंक को जारा।
लाह सामान लंक जरी गयी, जय-जय धुनि सुर पुर मंह भई।।

अब बिलम्ब केहि कारज स्वामी, कृपा करहु उर अंतरयामी।
जय जय लखन प्राण के दाता, आतुर भयं दुःख करहु निपाता।।

जय हनुमान जयति बलसागर, सुर समूह सैम रत भटनागर।
ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले, बैरिहिं मारू बज्र की कीलें।।

ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा, ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा ।
जय अंजनीकुमार बलवंता, संकर सुवन वीर हनुमंता ।।

बदन कराल काल कुल घालक, राम सहाय सदा प्रतिपालक ।
भूत प्रेत पिशाच निशाचर अग्नि बेताल काल मारी मर।।

इन्हें मारू तोही सपथ राम की, राखु नाथ मरजाद नाम की ।
सत्य होऊ हरि सपथ पाई कै, राम दूत धरु मारू धाई कै।।

जय जय जय हनुमंत अगाधा, दुःख पावत जन केहि अपराधा।
पूजा जप ताप नेम अचारा, नहीं जानत कछु दास तुम्हारा।।

बन उपबन मग गिरिगृह माहीं, तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ।
जनकसुता हरिदास कहावों, ताकि सपथ बिलम्ब न लावों ।।

जय जय जय धुनि होत अकासा, सुमिरत होय दुसह दुःख नासा ।
चरण पकरि कर जोरि मनावों, यहि अवसर अब केहि गोहरावों ।।

उठु उठु चलु तोही राम दुहाई, पायं परों करि जोरि मनाई ।
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता, ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता ।।

ॐ हं हं हाँक डेत कपि चंचल, ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल।
अपने जन को तुरत उबारो, सुमिरत होय आनंद हमारौ ।।

यह बजरंग बाण जेहि मारै, ताहि कहौ फिरि कवन उबारै।
पाठ करै बजरंग बाण की, हनुमत रक्षा करै प्राण की ।।

यह बजरंग बाण जो जापै, तासौं भूत प्रेत सब कापैं ।
धूप देय जो जपै हमेसा, ताके तन नहीं रहै कलेसा ।।

दोहा-
उर प्रतीति दृढ़ सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान ।
बाधा सब हर करै, सब काम सफल हनुमान ।।

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Doha-
Nischay Prem Pratiti te, Vinay Kare Sanamaan
Tehi ke kaaraj sakal shubh, siddh kare hanuman

Chaupai-
Jaya Hanumant sant hitkari, Suni Leejai Prabhu Vinay Hamari.
Jan ke Kaaj Vilamb Na Keejai, Aatur daur Mahasukh deejai.

Jaise Kood sindhu ke para, Sursa Badan Paithi Bistara.
Aage Jaay Lankini Roka, Maarehu Laat Gayi Sur loka.

Jaay Vibhishan ko sukh deenha, Sita Nirakhi Param Pad Leenha
Baag Ujaari Sindhu me Boraa, Ati Aatur Jam Kaatar tora.

Akshay Kumar Maari Sanhara, Loom lapeti Lank ko jaara.
Laah Samaan lank jari Gayi, Jay Jay dhuni sur pur manh bhayi.

Ab Vilamb kehi kaaraj swami, kripa karahu ur Antaryaami.
Jay Jay lakhan praan ke daata, Aatur hoye dukh karahu Nipaataa.

Jai Hanuman Jayati Bal Sagar, Sur Samuh sam rat bhatnaagar.
Om hanu hanu hanu hanumant hateele, Bairahin Maaru bajr ki kilen.

Om hrim hrim hrim hanumant kapisa, om hum hum hum hanu ari ur sisa.
Jay Anjani kumar Balvanta, shankar suvan veer hanumanta.

Badan karaal kaal kul ghaalak, raam sahay sada prati paalak.
Bhoot pret pishaach nishaachar, Agni betaal kaal maarimar.

Inhe maaru tohi sapath raam ki, raakhu nath marjaad naam ki.
Satya hohu hari sapath paai kai, raam doot dharu maaru dhaai kai.

jay Jay Jay Hanumant agaadha, dukh paavat jan kehi apradha.
pooja jap tap nem achaaraa, nahin jaanat kachu daas tumhara.

Van upvan mag girigrah maahin, tum bal hum darpat naahin.
Janak suta hari daas kahavaun, taaki sapath vilamb naa laavaun.

Jay jay jay dhuni hot akasaa, sumirat hoy dusah dukh naasaa.
charan pakari kar jori manavaun, yahi avsar ab kehi gohraavaun.

uth uth chalu tohi raam duhaai, paay paraun kar jori manaai.
Om cham cham cham cham chapal chalanta, om hanu hanu hanu hanu hanumanta.

Om ham ham haank det kapi chanchal, om sam sam sahami paraane khal dal.
apne jan ko turat ubaaro, sumirat hoy anand hamaro.

Yah bajrang baan jehi maare, taahi kahau phiri kavan ubaarai.
Paath karai bajrang baan ki, hanumat raksha karai praan ki.

Yah Bajrang baan jo jaapai, taasaun bhoot pret Sab kaapai.
Dhoop dey jo Japai Hamesaa, Taake tan Nahin Rahai Kalesa.

Doha- Ur Pratiti dridha saran hvai, paath karai dhari dhyaan.
Baadhaa sab har karai, sab kaam safal hanumaan.

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Saturday, April 11, 2020

Vaidyanatha Ashtakam lyrics in Sanskrit with Meaning

Lord Shiva scripture
Shri Vaidyanathashtakam in Sanskrit-

।ॐ।
श्री राम सौमित्रिजतायुवेद षडाननादित्य कुजार्चिताय।
श्री नीलकण्ठाय दयामयाय श्री वैद्यनाथाय नमः शिवाय।1।

गङ्गा प्रवाहेन्दु जटाधराय त्रिलोचनाय स्मरकालहन्त्रे।
समस्त देवैरभिपूजिताय श्री वैद्यनाथाय नमः शिवाय।2।

भक्तः प्रियाय त्रिपुरान्तकाय पिनाकिने दुष्टहराय नित्यम्।
प्रत्यक्ष लीलाय मनुष्यलोके श्री वैद्यनाथाय नमः शिवाय ।3।

प्रभूतवातादि समस्तरोग प्रनाशकत्रे मुनिवन्दिताय।
प्रभाकरेन्द्वग्निविलोचनाय  श्री वैद्यनाथाय नमः शिवाय ।4।

वाक्श्रोत्र नेत्राङ्घ्रि विहीनजन्तोः वाक्श्रोत्रनेत्राङ्घ्रि सुखप्रदाय ।
कुष्ठादिसर्वोन्नतरोगहन्त्रे श्री वैद्यनाथाय नमः शिवाय ।5।

वेदान्तवेद्याय जगन्मयाय योगीश्वरद्येय पदाम्बुजाय ।
त्रिमुर्तिरूपाय सहस्र नाम्ने श्री वैद्यनाथाय नमः शिवाय ।6।

स्वतीर्थमृद् भस्म्भृतान्ग भाजां  पिशाच दुखार्थि भयापहाय।
आत्मस्वरूपाय शरीर भाजां श्री वैद्यनाथाय नमः शिवाय।7।

श्री नीलकण्ठाय वृषध्वजाय स्रवगन्ध भस्माद्यपि शोभिताय।
सुपुत्रदारादि सुभाग्यदाय श्री वैद्यनाथाय नमः शिवाय ।8।

फलस्तुतिः-
वालाम्बिकेश वैद्येश भवरोगहरेति च ।
जपेन्नामत्रयं नित्यं महारोगनिवारणम् ।।

। इति श्री वैद्यनाथाष्टकम सम्पूर्णं ।

वैद्यनाथ अष्टकम हिंदी Lyrics अर्थ -

१- जो श्री राम, लक्ष्मण के द्वारा पूजे जाते हैं, जो जटायु के द्वारा पूजे जाते हैं, जो वेदों के पूज्य हैं, जो भगवान् सुब्रमण्यम के द्वारा पूज्य हैं, जो सूर्य और मंगल ग्रहों के द्वारा पूज्य हैं, जिनका गला नीला है और जो दयाभाव से परिपूर्ण हैं, वैद्यों के नाथ उन भगवान् शिव को नमस्कार है।

२- जो गंगा का प्रवाह और चन्द्रमा को अपनी जटाओं में धारण करते हैं, जिनके तीन नेत्र हैं और जो काल (समय) और कामदेव (प्रेम के देवता) के हन्ता (नष्ट करने वाले) हैं, सभी देवों के पूज्य और सभी वैद्यों के स्वामी उन भगवान् शिव को नमस्कार है।

३- जो अपने भक्तों के प्रिय हैं, जिन्होंने त्रिपुरासुर दैत्य का वध किया था, जो 'पिनाक' नामक धनुष धारण करते हैं, जो मनुष्यों के बीच बुराइयों का नाश करते हैं, वैद्यों के स्वामी (वैद्यनाथ) उन भगवान् शिव को नमस्कार है।

४- जो सभी रोगों का नाश करते हैं, जो संक्रमण को दूर करते हैं, जो ऋषि-मुनियों द्वारा पूजे जाते हैं और जिनके लिए सूर्य, चन्द्र और अग्नि तीन नेत्रों के समान हैं, उन वैद्यनाथ भगवान् शिव को नमस्कार है।

५- जो भगवान्उन लोगों को बोलने, सुनने और देखने का सुख प्रदान करते हैं जिनके पास बोलने सुनने और देखने की शक्ति नहीं होती, कुष्ठ रोगों जैसी विनाशकारी बिमारियों को दूर करने वाले उन वैद्यनाथ भगवान् शिव को नमस्कार है।

६- जिन्हें वेदान्त (उपनिषद्) के द्वारा जाना जा सकता है, जो सारे जगत में व्याप्त हैं, योगियों के द्वारा जिनके पड़ कमल पूजे जाते हैं, जो भगवान् विष्णु. ब्रह्मा और शिव के त्रिमूर्ति रूप हैं और जिनके सहस्रों (हजारों) नाम हैं, उन वैद्यानाथ भगवान् शिव को नमस्कार है।

७- जो अपने श्मशान की राख के स्पर्श से पिशाचों के दिए गये कष्टों, दुखों और भय को दूर करते हैं, जो आत्म स्वरुप हैं और मानव शारीर धारण किये हैं, उन वैद्यानाथ भगवान् शिव को नमस्कार है।

८- जिन भगवान का गला नीला है, जिनके ध्वज पर बैल बना हुआ है, जो पुष्प, चन्दन और भस्म से सुशोभित हैं, जो सुलक्षणा पत्नी और सुपुत्र का वर देते हैं और जो सभी को सौभाग्य प्रदान करते हैं, उन वैद्यनाथ भगवान् शिव को नमस्कार है।

फलस्तुति- जो इस मन्त्र (वैद्यनाथ अष्टक)  का नित्य प्रतिदिन तीन बार पाठ करके भगवान् वैद्यनाथ और उनकी पत्नी बलाम्बिका का वंदन करता है वह सभी रोगों से मुक्ति पाकर जन्म और मृत्यु के भय से मुक्त हो जाता है।

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Sunday, March 22, 2020

Vedokta Ratri Suktam with Meaning in Hindi


वेदोक्त रात्रि सूक्त ऋग्वेद के १०वें मंडल के १०वें अध्याय के 127वें सूक्त के अंतर्गत लिखा गया है। यह ऋग्वेद की 8 ऋचाएं हैं जिनमे रात्रि अर्थात रात की अधिष्ठात्री देवी भुवनेश्वरी का स्तवन ( आराधना ) होता है। दुर्गा सप्तशती पाठ के प्रारम्भ और अंत में "वेदोक्त देवी सूक्त" के पाठ के साथ इस स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यहाँ इस रात्रि सूक्त का उच्चारण हिंदी अर्थ सहित दिया गया है।

अथ वेदोक्तं रात्रि सूक्तम्

विनियोग: - ॐ रात्रीत्यद्यष्टर्चस्य सूक्तस्य कुशिकः, सौभरो रात्रिर्वा भारद्वाजो ऋषिः, रात्रिर्देवता, गायत्री छन्दः, देवीमाहात्म्यपाठे विनियोगः।
 मंत्रः -
ॐ रात्रीव्यख्यदायती पुरुत्रा देव्यक्षभिः। विश्वा अधि श्रियोऽधित।1।
ओर्वप्रा अमर्त्यानिवतो देव्युद्वतः। ज्योतिषा बाधते तमः ।2।

अर्थ-   महत्तत्त्वादिरूप व्यापक इन्द्रियों से सब देशों में समस्त वस्तुओं को प्रकाशित करने वाली ये रात्रिरूपा देवी अपने उत्पन्न किये हुए जगत के जीवों के शुभाशुभ कर्मों को विशेष रूप से देखती हैं और उनके अनुरूप फल की व्यवस्था करने के लिए समस्त विभूतियों को धारण करती हैं।१।
ये देवी अमर हैं और सम्पूर्ण विश्व को, नीचे फैलने वाली लता आदि को तथा ऊपर बढ़ने वाले वृक्षों को भी व्याप्त करके स्थित हैं; इतना ही नहीं, ये ज्ञानमयी ज्योति से जीवों के अज्ञानान्धकार का नाश कर देती हैं।२।

निरु स्वसारमस्कृतोषसं देव्यायती। अपेदु हासते तमः ।3।
सा नो अद्य यस्या वयं नि ते यामन्नविक्ष्महि। वृक्षे न वसतिं वयः ।4।

अर्थ-   परा चिच्छक्तिरूपा रात्रिदेवी आकर अपनी बहिन ब्रह्मविद्यामयी उषादेवी को प्रकट करती हैं, जिससे अविद्यामय अन्धकार का नाश हो जाता है।३।
ये रात्रिदेवी इस समय मुझ पर प्रसन्न हों, जिनके आनेपर हम लोग अपने घरों में सुख से सोते हैं- ठीक वैसे ही, जैसे रात्रि के समय पक्षी वृक्षों पर बनाये हुए अपने घोंसलों में सुखपूर्वक शयन करते हैं।४।

नि ग्रामासो अविक्षत नि पद्वन्तो नि पक्षिणः। नि श्येनासश्चिदर्थिनः ।5।
यावया वृक्यं वृकं यवय स्तेनमूर्म्ये। अथा नः सुतरा भव ।6।

अर्थ-   उस करुणामयी रात्रि देवी के अंक में सम्पूर्ण ग्रामवासी मनुष्य, पैरों से चलने वाले गाय, घोड़े आदि पशु, पंखों से उड़ने वाले पक्षी एवं पतंग आदि, किसी प्रयोजन से यात्रा करने वाले पथिक और बाज आदि भी सुखपूर्वक सोते हैं।५।
हे रात्रिमयी चिच्छक्ति! तुम कृपा करके वासनामयी वृकी तथा पापमय वृक को हमसे अलग करो। काम आदि तस्कर समुदाय को दूर हटाओ। तदनन्तर हमारे लिए सुख पूर्वक तरने योग्य हो जाओ- मोक्षदायिनी एवं कल्याणकारिणी बन जाओ।६।

उप मा पेपिशत्तमः कृष्णं व्यक्तमस्थित। उष ऋणेव यातय ।7।
उप ते गा इवाकरं वृणीष्व दुहितर्दिवः। रात्रि स्तोमं न जिग्युषे ।8।

अर्थ-   हे उषा! हे रात्रि की अधिष्ठात्री देवी ! सब और फैला हुआ यह अज्ञानमय कला अन्धकार मेरे निकट आ पहुंचा है। तुम इसे ऋण की भाँति दूर करो- जैसे धन देकर अपने भक्तों के ऋण दूर करती हो, उसी प्रकार ज्ञान देकर इस अज्ञान को भी मिटा दो।७।
हे रात्रिदेवी! तुम दूध देने वळील गौ के समान हो। मैं तुम्हारे समीप आकर स्तुति आदि से तुम्हें अपने अनुकूल करता हूँ।  परम व्योमस्वरूप परमात्मा की पुत्री! तुम्हारी कृपा से मैं काम आदि शत्रुओं को जीत चुका हूँ, तुम स्तोम की भाँती मेरे इस हविष्य को भी ग्रहण करो।८। 

।। इति श्री वेदोक्तं रात्रि सूक्तं सम्पूर्णम।।

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 रात्रि सूक्त का पाठ करने के बाद देव्यथर्वशीर्ष (देवी अथर्वशीर्ष स्तोत्र) का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है, यद्यपि सपतशती के अंग के रूप में इसका उल्लेख नहीं हुआ है तथापि यदि इसका पाठ शुभ फल देता है। इसे यहाँ पढ़ें- देव्यथर्वशीर्षम हिंदी अर्थ सहित
 
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अवश्य पढ़ें: दुर्गा सप्तशती (सभी स्तोत्र, मन्त्र)